July 3, 2026

Uttarkashi: विश्व प्रसिद्ध दयारा बुग्याल में 400 हेक्टेयर क्षेत्र पर संकट, खाई में बदल रहे घास के मैदान

उत्तरकाशी का विश्व प्रसिद्ध दयारा बुग्याल, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है, अब लगातार बढ़ते भू-धंसाव और भू-क्षरण की गंभीर चुनौती से जूझ रहा है। कभी मखमली घास से ढके मैदान अब गहरी खाइयों में तब्दील होते जा रहे हैं।

Uttarkashi Dayara Bugyal Land Subsidence Threatens 400 Hectares Soil Erosion Turns Alpine Meadows into Gullies

विश्व प्रसिद्ध दयारा बुग्याल में हो रहे भू-क्षरण और भूस्खलन के कारण करीब 400 हेक्टेयर में फैले क्षेत्र पर खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का कहना है कि इस पर वर्ष 2012-13 की आपदा के बाद से भू-धंसाव होने के कारण खतरा बना हुआ था लेकिन पिछले दो-तीन वर्षों से धियाणा बुग्याल के समीप नहेटा और चिलपाड़ा में भू-क्षरण के कारण कई खाई बनने लगीं है। यहां से निकलने वाला मलबा हर वर्ष पापड़गाड में आपदा का रूप बनकर आ रहा है।

दयारा बुग्याल समुद्रतल से करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। पिछले कुछ वर्षोंं में बुग्याल के निचले इलाकों धियाणा, बरनाला, गोई सहित नहेटा और चिलपाड़ा आदि क्षेत्र में तेजी से भू-धंसाव होने से वहां पर बड़ी-बड़ी खाई बन रही हैं। इससे दयारा बुग्याल के जैव विविधता पर भी असर पड़ रहा है।

हालांकि वन विभाग की ओर से वर्ष 2020 में वहां पर भारतीय वन्यजीव संस्थान और उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र की ओर से ईको फ्रेंडली तरीके से करीब 600 मीटर क्षेत्र में जूट व नारियल के रेशों से बने केयर नेट व पिरूल के चेक डैम बनाकर क्षरण रोकने की कोशिश की गई। यह उस क्षेत्र में सफल भी रहा लेकिन वर्ष 2024 और 25 में बुग्याल के अन्य क्षेत्रों नहेटा सहित चिलपाड़ा आदि में सबसे अधिक भूस्खलन और भू-धंसाव देखने को मिला है।

विभाग से दूरगामी योजना बनाने की मांग 
लगातार हो रहे भू-धंसाव के कारण बुग्याल क्षेत्र में बन रही खाई से बहने वाली मिट्टी पापड़गाड नदी में तबाही बनकर बह रहा है। नहेटा में घने जंगलों में भी भू-धंसाव व भूस्खलन के कारण वन संपदा क्षतिग्रस्त हो रही है। दूसरी ओर दयारा बुग्याल ट्रैक के मुख्य पड़ाव धियाणा, बरनाला, गोई आदि तोक के बुग्यालों में मैदानों ने बड़ी खाइयों का रूप ले लिया है।

क्यारक के पूर्व प्रधान विपिन राणा का कहना है कि बुग्याल क्षेत्र में हो रहे भू-धंसाव का असर रैथल और क्यारक गांव सहित गंगोत्री हाईवे तक देखने को मिल रहा है। कई संपत्तियां इस कारण क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। बार्सू प्रधान दीपा रावत का कहना है कि बरनाला क्षेत्र में भी भू-धंसाव व भूस्खलन तेजी से दिख रहा है। इसके लिए वन विभाग से दूरगामी योजना बनाने की मांग की गई है।

उत्तरकाशी वन प्रभाग के डीएफओ डीपी बलूनी का कहना है कि वन विभाग की ओर से लगातार जूट केयर नेट आदि के माध्यम से बुग्याल संरक्षण के लिए कार्य किया जा रहा है। पूर्व में वहां पर किया गया सुरक्षात्मक कार्य सफल रहा था। इसी तर्ज पर पर भारतीय वन्य जीव संस्थान और विशेषज्ञों के साथ मिलकर दयारा बुग्याल के संरक्षण के लिए विस्तृत योजना तैयार की जा रही है।

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