कांग्रेस की पहली सूची जारी होने के बाद हरक सिंह रावत लौटे देहरादून, चुनाव लड़ने पर कहीं ये बातें

पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत रविवार को देहरादून लौट आए। वह सोमवार को कांग्रेस के प्रचार अभियान से जुड़ेंगे। चौबट्टाखाल से चुनाव लड़ने की चर्चाओं की खबरों को उन्होंने सिरे से खारिज किया। कहा कि वे चुनाव लड़ेंगे या पार्टी के लिए प्रचार संभालेंगे, इसका फैसला पार्टी को लेना है। उनके या बहु अनुकृति के टिकट पर फैसला पार्टी को करना है।
हरक ने कहा कि वो सोमवार को कांग्रेस के कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके साथ ही प्रचार अभियान से भी जुड़ेंगे। वे पार्टी प्रत्याशियों के लिए खुलकर प्रचार करेंगे। कांग्रेस को सत्ता में लाने के लिए काम करेंगे। वे हर उस सीट पर प्रचार करेंगे, जहां उनका प्रभाव है। अपनी ओर से पूरा प्रयास करेंगे कि कांग्रेस भारी बहुमत से विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करे।
उन्होंने चौबट्टाखाल से चुनाव लड़ने के सवाल पर कहा कि उनकी ओर से किसी भी सीट पर चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं जताई गई है। उनका इस्तेमाल किस तरह किया जाना है, ये कांग्रेस पार्टी को तय करना है। उन्हें या अनुकृति को टिकट देने के सवाल पर कहा कि वे चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं है। ये पहले भाजपा को भी बता दिया गया था। अब कांग्रेस को भी बता दिया गया है।
कांग्रेस की पहली सूची जारी होने के बाद बाजपुर विधानसभा सीट से बगावत शुरू हो गई है। वर्ष 2017 में कांग्रेस की प्रत्याशी रही सुनीता टम्टा बाजवा ने कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। सुनीता ने कांग्रेस पर भी भाजपा की तरह किसान और महिला विरोधी होने का आरोप लगाकर इसकी नीतियों के खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला लिया है।
वह चुनाव किस पार्टी से लड़ेंगी, अभी इस पर सस्पेंस बरकरार रखा है। सुनीता एवं उनके पति किसान नेता जगतार बाजवा ने सोमवार को सुबह 10 बजे एक बैठक बुलाकर अगली रणनीति पर चर्चा कर नये विकल्पों की घोषणा करने की बात कही है। वर्ष 2017 में सुनीता कांग्रेस की प्रत्याशी थीं। इन्होंने भाजपा प्रत्याशी यशपाल आर्य के खिलाफ चुनाव लड़ा और 42329 मत प्राप्त किये थे।
हारने के बाद भी सुनीता कांग्रेस के लिये मजबूती से काम करती रही थीं। हाल ही में दल बदल कर एक बार फिर से यशपाल आर्य कांग्रेस में शामिल हो गये हैं। शनिवार देर रात कांग्रेस ने 53 प्रत्याशियों की सूची जारी की। इसमें बाजपुर सीट पर यशपाल आर्य को प्रत्याशी बनाये जाने के बाद सुनीता खेमा नाराज हो गया है।
रविवार सुबह सुनीता के आवास पर उनके समर्थकों का जमावड़ा लगा रहा। सुनीता ने अपने समर्थकों को साफ कहा कि वे तैयारी करें चुनाव तो वह जरूर लड़ेंगी, लेकिन किस पार्टी से लड़ेंगी, इसका फैसला सोमवार को बैठक कर लिया जायेगा। कहा कांग्रेस में कार्यकर्ता की कोई पूछ नहीं है। दलबदल करने वालों को सिर माथे पर सजाया जाता है। उन्होंने कहा कि बीत दस वर्षों से वह तथा उनके पति किसान नेता जगतार बाजवा बाजपुर की जनता के लिये संघर्ष कर रहे हैं।
उन्होंने भाजपा और कांग्रेस पर महिलाओं एवं किसानों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है। वहीं, किसान नेता बाजवा ने कहा कि राष्ट्रीय दलों ने साबित किया है उनकी सोच किसान, मजदूर, महिलाओं के विरोध में है। नैनीताल और बाजपुर में दलबदलुओं को टिकट देकर कांग्रेस ने महिलाओं का अपमान किया है। यहां कुलविंदर सिंह किंदा, दर्शन गोयल, अजीत प्रताप रंधावा, मंदीप नरवाल, सुनील पाठक, मंगा सिंह, गुरदेव सिंह लाहौरिया, सुखचैन बाजवा रहे।
2017 विधानसभा चुनाव के दौरान चली एकतरफा मोदी लहर ने कांग्रेस को उत्तराखंड में व्यापक पैमाने पर नुकसान पहुचांया था। कांग्रेस के एक से बढ़कर एक कद्दावर नेताओं, विधायकों को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। नतीजा यह रहा कि कांग्रेस राज्य में 11 सीटों पर ही सिमट कर रह गई थी। अब 5 साल बाद कांग्रेस फिर सत्ता पाने की जुगत में है। ऐसे में पार्टी हाईकमान ने कुमाऊं में 11 ऐसे नेताओं और विधायकों पर दोबारा भरोसा किया है, जो 2017 चुनाव हार गए थे। जबकि, 08 सीटों पर नए चेहरे मैदान में उतारे गए हैं। वहीं, चार सिटिंग विधायक भी अपना टिकट कटने से बचाने में कामयाब रहे हैं।
ये होंगे कांग्रेस के नए चेहरे
गंगोलीहाट खजान गुड्डू
बागेश्वर रणजीत दास
नैनीताल संजीव आर्य
हल्द्वानी सुमित ह्रदयेश
काशीपुर नरेंद्र चंद्र सिंह
गदरपुर प्रेमानंद महाजन
रुद्रपुर मीना शर्मा
सितारगंज नवतेज पाल सिंह
इन सिटिंग विधायकों के बचे टिकट
जागेश्वर गोविंद सिंह कुंजवाल
रानीखेत करन माहरा
जसपुर आदेश चौहान
धारचूला हरीश सिंह धामी
2017 में हारे प्रत्याशी, जिन्हें दोबारा टिकट मिला
डीडीहाट प्रदीप पाल
पिथौरागढ़ मयूख महर
कपकोट ललित फस्र्वाण
द्वाराहाट मदन सिंह बिष्ट
सोमेश्वर राजेन्द्र बाराकोटी
अल्मोड़ा मनोज तिवाड़ी
लोहाघाट खुशाल सिंह अधिकारी
चम्पावत हेमेश खर्कवाल
भीमताल दान सिंह भंडारी
नानकमत्ता गोपाल राणा
खटीमा भुवन कापड़ी
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