उत्तराखंड भाषा संस्थान के एक्ट में संशोधन कर इसके मुख्यालय से देहरादून का नाम हटाया जाएगा। इस बदलाव के बाद मुख्यमंत्री की घोषणा पर संस्थान के मुख्यालय को गैरसैंण ले जाने की तैयारी है। कैबिनेट में इसका प्रस्ताव आ सकता है।
प्रदेश में स्थानीय बोली, भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए फरवरी वर्ष 2009 में भाषा संस्थान की स्थापना की गई थी, लेकिन इसकी स्थापना के बाद से संस्थान को अपना स्थाई मुख्यालय नहीं मिल पाया है। छह अक्तूबर 2020 को त्रिवेंद्र सरकार ने गैरसैंण में भाषा संस्थान का मुख्यालय बनाने की घोषणा की थी। उस दौरान कहा गया था कि गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया गया है। गैरसैंण में भाषा संस्थान के मुख्यालय के बाद वहां विभिन्न संस्थानों की स्थापना की प्रक्रिया शुरू होगी।
संस्थान की भूमि के लिए भी 50 लाख की धनराशि की व्यवस्था की गई थी, लेकिन इस दिशा में कुछ नहीं हुआ। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक मुख्यमंत्री की घोषणा पर अमल के लिए भाषा संस्थान के एक्ट में संशोधन करना होगा। एक्ट में संस्थान का मुख्यालय देहरादून दर्शाया गया है। इसमें संशोधन के बाद संस्थान का मुख्यालय गैरसैंण ले जाया जाएगा। इसके लिए कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा। विभाग के सचिव विनोद रतूड़ी से इस संबंध में प्रयास के बाद भी संपर्क नहीं किया जा सका।
वर्ष 2020 में मुख्यमंत्री की घोषणा है कि भाषा संस्थान का मुख्यालय गैरसैंण में बने। इसके लिए पहले एक्ट में संशोधन किया जाना है।
-स्वाती भदौरिया, निदेशक भाषा संस्थान
भाषा संस्थान का मुख्यालय गैरसैंण में बनाने को लेकर शासन का अनुमोदन के लिए प्रस्ताव अभी मुझे नहीं मिला। मिलने के बाद इस संबंध में कुछ कहा जा सकेगा।
– सुबोध उनियाल, मंत्री भाषा